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हिन्दी विभाग - सदस्यगण


nisha nag

डॉ. निशा नाग पुरोहित, एम.ए., एम.फिल.(दिल्ली विश्वविद्यालय) पीएच.डी.(जामिया मिलिया इस्लामिया)

डॉ. निशा नाग पुरोहित ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए. एवम एम. फिल. तथा जामिया मीलिया इस्लामिया से ‘राजनीतिक कविताओं की अंतर्वस्तु एवम रूप” विषय पर पी.एच. डी. की है । केन्द्रीय हिन्दी संस्थान से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान डिप्लोमा के साथ –साथ पत्रकारिता एवम विज्ञापन में भी डिप्लोमा किया है। ‘विज्ञापन का मनोविज्ञान एवम भाषा’ पर अन्य लघु शोध प्रबंध। यू.जी.सी की जूनियर एवम सीनियर फेलोशिप प्राप्त की है। आलोचना, आधुनिक कविता एवम मीडिया विशेष अध्ययन के क्षेत्र रहे हैं। गत 25 वर्षों से रेडियो से भी जुडी हुई हैं। कार्यक्रम उद्घोषक के साथ साथ विभिन्न परिचर्चाओं,वार्ताओं तथा कार्यक्रम निर्माण में भी भाग लिया है। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में शोध-लेख,आलोचना, समीक्षाएँ तथा कहानियाँ निरंतर प्रकाशित। दो पुस्तकों में अध्याय एवम “राजनीतिक कविता की अवधारणा एवम नागार्जुन’’ पुस्तक प्रकाशित।


Rajni disodia

डॉ. रजनी दिसोदिया, एम.ए. एम.फिल. पीएच.डी. ( दिल्ली विश्वविद्यालय)

डा. रजनी दिसोदिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए., एम.फिल., बी.एड. (सी.आई.ई.) किया है। उनकी एम.फिल. और पीएच.डी. दोनों का क्षेत्र उपन्यास साहित्य रहा। ‘रांगेय राघव के उपन्यास साहित्य में दलित चेतना’ उन्होंने पीएच.डी. की। नवम्बर 1998 से वे मिराण्डा हाउस में कार्यरत हैं। कॉलेज में अध्यापन कार्य के साथ-साथ साहित्यिक लेखन में उनकी विशेष रूचि है। कविताएँ, कहानियाँ और समसामयिक ज्वलंत मुद्दों पर गंभीर लेखन लगातार विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होता रहता है। 2014 में उनका पहला कहानी संग्रह “चारपाई” प्रकाशित हुआ। 2019 में इस संग्रह का दूसरा संस्करण आना इसके लोकप्रिय होने का उदाहरण है। इस संग्रह की कहानियों का अनुवाद भारत की अन्य भाषाओं बंगाली, तमिल के साथ साथ अंग्रेजी में भी हुआ है। डा. दिसोदिया की कहानियों पर शोध कार्य भी अलग-अलग विश्वविद्यालयों में चल रहा है। जल्द ही उनके अगले कहानी संग्रह के आने की योजना भी है। डॉ. दिसोदिया की कहानियाँ लगातार बड़ी साहित्यिक पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। डॉ. दिसोदिया का कविता संग्रह भी वर्ष 2018 में प्रकाशित हुआ। समसामयिक विषयों, विशेष रूप से साहित्य और समाज में महिलाओं और दलितों की स्थिति को लेकर उनकी आलोचना पुस्तक “साहित्य और समाज: कुछ बदलते सवाल” नाम से वर्ष 2019 में आ चुकी है। हिन्दी साहित्य में ‘दलित स्त्री विमर्श’ संबंधी गंभीर अध्ययन को लेकर उनकी शोधपरक पुस्तक भी जल्द ही प्रकाशित होने वाली है। दलित साहित्य की शोध पत्रिका (अपेक्षा त्रैमासिक) के संपादन सहयोग से भी वे करीब दस वर्षौं तक जुड़ी रहीं। दलित साहित्य और विमर्श पर विशेष अध्ययन होने के नाते वे वक्ता के रूप में बुलाई जाती हैं। डा. दिसोदिया ने “भाषा साहित्य और सर्जनात्मकता” नाम से विश्वविद्यालय के चारवर्षीय पाठ्यक्रम की सहलेखक रही हैं।


kavita

डॉ कविता भाटिया , एम.ए, एम फिल, पीएच.डी.(दिल्ली विश्वविद्यालय)

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एम.ए, एम.फिल तथा पीएच.डी के अतिरिक्त पत्रकारिता एवं जनसंचार में पी. जी डिप्लोमा । विशेष अध्ययन क्षेत्र-- आधुनिक हिंदी कविता, समकालीन हिंदी कविता एवं जनसंचार । हिंदी की विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं समीक्षा, पाखी, उद्भावना, हंस, अनभै साँचा, समकालीन भारतीय साहित्य तथा 'जानकीपुल ' पर कविताएं एवं समीक्षाएँ और जनसत्ता तथा हिंदुस्तान पत्र में समसामयिक विषयों पर लेख प्रकाशित । मुक्त शिक्षा परिसर तथा आइ.एल.एल.एल के पाठ्यक्रम में कवि अरुण कमल तथा कवि कुँवर नारायण पर पाठ प्रकाशित । उत्कृष्ट कविता लेखन के लिए हिंदी अकादेमी , दिल्ली द्वारा दो बार पुरस्कृत । प्रकाशित कृतियॉ--आपात समय के लिए ( काव्य संग्रह वर्ष 2000 ) किसी नवजात सुबह का इंतज़ार ( काव्य संग्रह वर्ष 2008 ) अस्मिता बोध के विविध आयाम ( आलोचना पुस्तक वर्ष 2015 ) विभिन्न महाविद्यालयों की अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रपत्र प्रस्तुत तथा शोध पत्रिकाओं में पेपर प्रकाशित । समकालीन हिंदी कविता कोश ( संपादक गुरचरण सिंह ) में कविताओं की समीक्षा एवं उल्लेख । हिंदी की चर्चित कवयित्रियाँ भाग 2 में कविताएँ संकलित । वर्तमान समय मे सोशल मीडिया पर शोधपरक कार्य करते हुए ' संवाद पथ ' पत्रिका के अंकों में ‘वर्चुअल रियल्टी और अस्मिता बोध' और ‘सोशल मीडिया की भाषा' शीर्षक से शोधपरक लेख प्रकाशित । विभागीय हस्तलिखित पत्रिका‘पहचान' ( अन्तरमहाविद्यालयी स्तर पर ) की संपादक ।


डाँ. रमा यादव, एम.ए.,एम.फिल.,पीएच.डी.(दिल्ली विश्वविद्यालय)

डॉ रमा यादव ने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी नाटक में पीएच.डी की। रमा यादव के एम्.ए तथा एम्.फिल में अध्यन के विशेष क्षेत्र आधुनिक कविता रहे । आरम्भ से ही नाटक तथा रंगमंच में उनकी विशेष रुचि रही । डॉ रमा यादव ने सन २००२ में श्रीराम सेंटर फॉर पर्फोर्मिंग आर्ट्स से नाट्य के अभिनय और निर्देशन के क्षेत्र में दो साल का विधिवत प्रशिक्षण लिया ।दिल्ली के श्रीराम सेंटर, कमानी, अभिमंच तथा मुंबई के पृथ्वी, लखनऊ के रविन्द्रालय सहित रमा यादव ने अनेक भारतीय मंचों पर महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन किया । रमा यादव प्रसिद्ध रंग निर्देशक भानु भारती की आज थियेटर रेपैट्री से सन २००२ से जुड़ी हैं और इस मध्य उन्होंने २०११ में फिरोजशाह कोटला में होने वाले नाटक तुगलक में सह- निर्देशक की भूमिका भी निभाही ।वर्ष १९९९ में रमा यादव ने भारतीय अनुवाद परिषद् से अनुवाद में एक वर्षीय डिप्लोमा भी किया इसके साथ ही उन्होंने कई रेडियो नाटक और कहानियां भी लिखी जो समय- समय पर रेडियो पर प्रसारित होती रही ।डॉ रमा यादव की रूचि भारतीय क्लासिकल और लोक नृत्य में भी रही वर्ष २०१३ में उन्हें आई. सी. सी. आर द्वारा दो वर्षों के लिए हिन्दी चेयर पर हंगरी की राजधानी बुदापैश्त भेजा गया जहाँ उन्होंने हिन्दी पढ़ाने के अतिरिक्त अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों को अंजाम दिया । इस दौरान डॉ रमा यादव ने मध्यकालीन कवयित्री मीराबाई पर विशेष अध्यन किया तथा मीरा पर विशेष लेख लिखे और उन्हें विविध मंचों से प्रस्तुत भी किया । आस्ट्रिया की वियना यूनिवर्सिटी में पढ़ा मीरा का पर्चा इस यात्रा का उनका विशेष पर्चा रहा । साथ ही उनके द्वारा निर्देशित और अभीनीत मीराबाई का मंचन हंगरी के विभिन्न मंचों पर हुआ । इसके अतिरिक्त डॉ रमा यादव ने अपने यूरोप प्रवास के दौरान वहाँ की महत्वपूर्ण पत्रिका अमृत में भी सम्पादन सहयोग दिया और अनेक लोक नृत्यों का निर्देशन किया । नाटक के साथ आधुनिक और मध्यकालीन कविता उनके अध्यन के प्रमुख क्षेत्र हैं l डॉ रमा यादव हिन्दी की अनेक पत्रिकाओं में समय-समय पर नाट्य संबंधी लेख, कविताएँ और कहानियां लिखती रही हैं ।


balwant  kaur

डॉ. बलवंत कौर, एम.ए.,एम.फिल.,पीएच.डी.(दिल्ली विश्वविद्यालय)

डॉ० बलबन्त कौर ने स्नातक तथा स्नातकोत्तर हिन्दी की पढ़ाई मिराण्डा हाउस से सम्पन्न करने के पश्चात 2000 में ‘हिन्दी तथा उर्दू की चयनित लेखिकाओं की दृष्टि और सृष्टि’ विषय पर अपना पी.एचडी कार्य सम्पन्न किया। इसके अतिरिक्त डॉ० बलबन्त कौर ने ‘जनसंचार तथा पत्रकारिता’, ‘हिन्दी कम्प्यूटर तथा ‘उर्दू भाषा और साहित्य’ का भी विशेष रूप से अध्ययन किया है। हिन्दी साहित्य की प्रमुख पत्रिका ‘हंस’ के सम्पादन से डॉ० बलबन्त कौर पिछले ६ वर्षों से जुडी हुई है। 2006 से डॉ० बलवन्त कौर मिराण्डा हाउस, हिन्दी विभाग की स्थायी सदस्य के रूप मे कार्यरत है। राष्ट्रीय तथा अन्तराष्ट्रीय स्तर की कईं पत्रिकाओं मे इनके लेख तथा अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं। राजेन्द्र यादव ग्रंथावली के 15 खंड़ों के सम्पादन के अतिरिक्त इनकी 4 अन्य सम्पादित किताबें भी हैं। आधुनिक भारतीय साहित्य विशेष रूप से विभाजन का साहित्य. महिला लेखन, हिन्दी आलोचना में डॉ० कौर अपना ख़ास दख़ल रखती हैं।


uma meena

डॉ. उमा मीना, एम.ए.,एम.फिल.,पीएच.डी.(राजस्थान विश्वविद्यालय)

डॉ.उमा मीना ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.ए (हिन्दी ऑनर्स ),एम. ए और बी. एड किया। “दलित साहित्य का सामाजिक यथार्थ” विषय में वर्ष 2005 में एम.फिल और “हिन्दी आत्मकथा साहित्य : स्वरुप एवं विश्लेषण” विषय में वर्ष 2010 में पी.एच .डी की उपाधि प्राप्त की। यू.जी.सी.की जूनियर फेलोशिप प्राप्त की। वर्ष 2006 से मिरांडा में कार्यरत डॉ. मीना ने मध्यकालीन साहित्य, भाषा विज्ञान, साहित्य का इतिहास, विज्ञापन, अस्मितामूलक विमर्श , पाश्चात्य काव्यशास्त्र और बी. ए प्रोग्राम के पाठ्यक्रम का अध्यापन किया। लम्बे समय से ये महाविद्यालय की फाइन आर्ट्स सोसाइटी और इंडियन डांस सोसाइटी से जुडी रही हैं। आत्मकथा साहित्य पर इनकी पुस्तक "स्मृतियों का प्रत्याख्यान" वर्ष 2015 में प्रकाशित हो चुकी है। दलित चेतना, स्त्री विमर्श और आत्मकथा साहित्य से सम्बंधित लेख विभिन्न पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं।


Renu Aroa

डॉ. रेणु अरोड़ा, एम.ए.,एम.फिल.,पीएच.डी.(दिल्ली विश्वविद्यालय)

डॉ. रेणु अरोड़ा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्प्रस्थ महाविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और दिल्ली विश्वविद्यालय से ही एम.फिल् और पी.एच.डी किया। नाटक और रंगमंच उनका विशेष अध्ययन-अध्यापन और रुचि का क्षेत्र है। ‘मोहन राकेश और विजय तेंदुलकर के नाटकों का भारतीय रंग-परिप्रेक्ष्य में तुलनात्मक अध्ययन’ उनके शोध का विषय रहा। वर्ष 2000 में उन्हें पी.एच.डी की उपाधि मिली। हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद का उन्होंने डिप्लोमा कोर्स किया। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से थियेटर एपप्रिसिएशन का कोर्स किया। 1999 से अध्यापन कार्य में संलग्न। अप्रैल 2006 से मिरांडा हाउस में स्थायी प्राध्यापक के पद पर कार्यरत। शिक्षण के अलावा नाट्य-संस्था अनुकृति की नाट्य-गतिविधियों में सक्रिय सहयोग। विजय तेंदुलकर,बादल सरकार,भुवनेश्वर,भीष्म साहनी आदि नाट्य-लेखकों और हबीब तनवीर, ब.व.कारंत,त्रिपुरारी शर्मा आदि रंग-निर्देशकों के नाट्यकर्म पर लिखे लेख नटरंग,रंग-प्रसंग,संगना आदि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित। रंग-गतिविधियों पर समीक्षा,समसामयिक मुद्दों पर लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। 18 वें भारत रंग महोत्सव में रंग-समीक्षक के तौर पर सक्रिय भागीदारी। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की थियेटर-इन-एजूकेशन कंपनी के लिए उन्हीं के द्वारा खेले गए चार नाटकों का नाट्यालेखन। प्रसिद्ध नाटककार एवं रंग-निर्देशिका त्रिपुरारी शर्मा के नाटक रूप-अरूप और राधा नाट्य-आलेख व प्रस्तुति-समीक्षा कथादेश पत्रिका में प्रकाशित। आकाशवाणी, ‘दिल्ली के महिला एवं बाल प्रभाग’‘विदेश सेवा प्रभाग,(हिंदी)‘से प्रसारित कार्यक्रमों में समय-समय पर भागीदारी।


Chanda

डॉ. चंदा सागर, एम.ए.,एम.फिल.,पीएच.डी.(दिल्ली विश्वविद्यालय)

चंदा सागर ने दिल्ली विश्वविद्यालय-नई दिल्ली से उच्च शिक्षा और शोधकार्य किया है। दलित साहित्य और आलोचना इनकी विशेषज्ञता में शामिल हैं। विभिन्न महाविद्यालयों में अध्यापन का अनुभव आपका रहा है। अतिथि सहायक प्रोफेसर राजधानी कॉलेज, दिल्ली, 9 सितम्बर 2002 से 13 नवम्बर 2004 तक। तदर्थ सहायक प्रोफेसर: राम लाल आनन्द कॉलेज, दिल्ली, 14 नवम्बर 2003 से 16 नवम्बर 2004 तक। स्थाई सहायक प्रोफेसर: अदिति महाविद्यालय दिल्ली, 16 नवम्बर 2004 से 10 अप्रैल 2006 तक। 10 अप्रैल 2006 से अब तक मिराण्डा हाउस, दिल्ली में कार्यरत। कई पत्र-पत्रिकाओं और पुस्तकों में आलेख प्रकाशित है। ‘ख्वाहिशों का आसमान’ नाम का कविता-संग्रह प्रकाशित हो चुका है।



aparajita

सुश्री अपराजिता शर्मा, एम.ए.,एम.फिल.(दिल्ली विश्वविद्यालय)

सुश्री अपराजिता शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी॰ए॰, एम॰ए॰ तथा एम॰फ़िल की डिग्री प्राप्त की। जुलाई 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत पंजीकृत अपना शोध प्रबंध पीएचडी उपाधि हेतु जमा कर दिया है। अपराजिता शर्मा बी॰ए॰, एम॰ए॰ तथा एम०फ़िल में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विषय की टॉपर रहीं । स्नातक स्तर पर उन्हें भारत भूषण अग्रवाल स्कॉलरशिप भी प्राप्त हुई। आधुनिक हिंदी कविता तथा आधुनिक आलोचना उनके रुचि क्षेत्र हैं। साल 2016 में अपराजिता ने देवनागरी हिंदी चैट स्टिकर्स की पहली एप ‘हिमोजी’ लॉन्च की जिसकी देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों, चैनलों में चर्चा रही। मार्च 2017 में लाइफ़स्टाइल पत्रिका फ़ेमिना हिंदी ने १०१ सशक्त महिलाओं की सूची में अपराजिता शर्मा को हिमोजी के साथ शामिल किया गया।कला, तकनीक तथा साहित्य के बीच हिंदी भाषा के लिए काम करते हुए अपराजिता उस समय नए प्रॉजेक्ट्स के साथ जुड़ी हैं।


डॉ. संगीता राय , एम.ए.(पूर्वांचल विश्वविद्यालय) एम.फिल.,पीएच.डी.(दिल्ली विश्वविद्यालय)

डॉ. संगीता राय ने ग्रेजुएशन तथा पोस्ट ग्रेजुएशन पूर्वांचल विश्वविद्यालय से किया। इसके साथ ही एम. फिल. तथा पी-एच. डी. की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय से ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के ऊर्दू विभाग से उर्दू में डिप्लोमा कोर्स किया। इसके साथ ही कोटा ओपन यूनिवर्सिटी से bjmc तथा mjmc का कोर्स भी किया।2002 से वो निरंतर आकाशवाणी के एफ.एम.गोल्ड चैनल से जुड़ी हुई हैं। कई वर्षों तक उन्होंने दिल्ली दूरदर्शन में समाचार वाचक के रूप में काम किया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में भी उन्होंने कुछ समय तक शोध कार्य किया। रंगमंच तथा सिनेमा उनकी रुचि के विशेष विषय हैं। बाल-पत्रिका किल्लोल के संपादक के रूप में भी वो कार्य कर चुकी हैं।