
डॉ.निशा नाग ने एम.ए.,एम.फिल. और ‘राजनीतिक संदर्भों की हिन्दी कविता’विषय पर पी-एच.डी. की उपाधि ग्रहण की है|यू.जी.सी. रिसर्च फ़ेलोशिप प्राप्त करने के साथ केन्द्रीय हिन्दी संस्थान से अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान, जनसंचार एवं विज्ञापन मे डिप्लोमा किया है| आधुनिक कविता,भाषा विज्ञान पत्रकारिता एवं आलोचना में रूचि | निशा वर्षो से रेडियो से जुड़ी रही हैं| ये उद्घोषक रही हैं एवं अनेक वार्ताओं तथा कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों में सक्रिय सहयोग दिया है|समसामयिक विषयों पर अनेक लेख ,आलोचना, समीक्षाएं एवं कहानियां हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं जैसे हंस,कथादेश ,पाखी ,अनभे साँचा, समकालीन भारतीय साहित्य, प्रत्यय, प्रतिशीर्षक,संवेद, प्रगतिशील वसुधा,अलाव ,साखी,अक्षरा,कला वसुधा,जनसत्ता आदि में निरंतर प्रकाशित|अनेक राष्ट्रीय संगोष्ठियों एवं परिचर्चाओं सक्रिय प्रतिभागिता| ‘राजनीतिक कविता की अवधारणा एवं नागार्जुन का कविकर्म’ विषय पर आलोचना पुस्तक प्रकाशित|मिरान्डा हाउस में गत 28 वर्षों से अध्यापन|

मिराण्डा हाउस में इस समय प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत डॉ० रजनी दिसोदिया ने बी.ए..बी.एड.,एम.ए. एम.फिल. और पीएच.डी. आदि अपनी तमाम शैक्षिक योग्यताएँ दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्जित की हैं। बचपन से पढ़ने-पढ़ाने का स्वप्न लेकर चलने वाली रजनी ने अपने कैरियर की शुरूआत सरकारी स्कूल में भाषा अध्यापिका के रूप में की और अब पिछले 28 वर्षों से मिराण्डा हाउस में कार्यरत हैं। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन कोर्स भी किया है। रजनी को बचपन से ही रचनात्मक लेखन का शौक रहा है। उनका पहला कहानी संग्रह ‘चारपाई’ 2014 में छपकर आया जिसमें संकलित कहानियाँ पहले ही विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी थीं। इस संग्रह की कई कहानियों के अनुवाद तमिल, बंगाली, पंजाबी और अंग्रेजी में हो चुके हैं। हिन्दी कहानी के विभिन्न संकलनों में भी इनकी कुछ कहानियाँ संकलित की गई हैं। 2019 में इस कहानी संग्रह का पुन:मुद्रण किया गया जो पाठकों और शोधार्थियों में इसकी माँग को देखते हुए किया गया। ‘छोटी बहु’ शीर्षक से इनका दूसरा कहानी संग्रह भी वर्ष 2025 में प्रकाशित हुआ। रजनी की कहानियाँ विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं साथ ही उन पर विभिन्न विश्वविद्यालयों में शोधकार्य भी किया जा रहा है। ‘कहानी बहुत पुरानी है’ नाम से रजनी का एक कविता संग्रह भी 2018 प्रकाशित है। अज्ञेय के ‘नदी के द्वीप’ और जनेन्द्र के ‘त्यागपत्र’ पर एमफिल करने और फिर ‘रांगेय राघव के उपन्यासों में दलित चेतना’ विषय पर पीएच.डी करने के बाद दलित साहित्य और दलित आलोचना उनके लेखन का प्रमुख क्षेत्र बन गया। अपने समय की बहुचर्चित अम्बेडकरवादी पत्रिका ‘अपेक्षा’ में संपादन सहयोग के साथ-साथ वे लगातार इस पत्रिका में लिखती रहीं। इसके अलावा अन्य पत्र- पत्रिकाओं में उनके साहित्यिक आलोचना और समसामयिक विषयों पर लेख प्रकाशित होते रहते हैं। ‘साहित्य और समाज कुछ बदलते सवाल’ नाम से आलोचना की पुस्तक 2019 में प्रकाशित हुई है और दलित महिला लेखन पर केन्द्रित दूसरी आलोचना पुस्तक “लोई और लूना की बात’ 2022 में प्रकाशित हो चुकी है। इस समय डा. दिसोदिया समय संज्ञान नामक (पीयर रिव्यूड) पत्रिका के प्रकाशन से भी जुड़ी हुई हैं। यह पत्रिका इस समय दलित साहित्य और दलित साहित्य आलोचना की कुछ विशिष्ट चुनिन्दा पत्रिकाओं में विशेष स्थान रखती है। डा० दिसोदिया कॉलेज के लिए हिन्दी अनुवाद का कार्य भी करती रही हैं। कॉलेज हैंडबुक, का उन्होंने हिन्दी अनुवाद किया है। इस सबके बावजूद उनका मन सबसे ज्यादा अपनी लेक्चर ( ट्यूट्स भी) कक्षाओं में अपनी छात्राओं के साथ रमता है जिसके लिए और सभी काम छोड़े जा सकते हैं।

डॉo कविता मेहता भाटिया
प्रोफेसर
दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए ( हिन्दी ) एम.फिल एवं पी एच. डी | कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा | 25 वर्षों से हिन्दी विभाग में अध्यापन |आधुनिक कविता, समकालीन कविता तथा पत्रकारिता व जनसंचार विशेष अध्ययन क्षेत्र रहे हैं | अध्यापन के अतिरिक्त साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं- गगनांचल, संवाद पथ, लमही,अक्षरा, हंस, समकालीन भारतीय साहित्य, जनकृति आदि में शोध आलेख, पुस्तक समीक्षाएं तथा कविताएं प्रकाशित | प्रकाशित पुस्तकों में आपात समय के लिए, किसी नवजात सुबह का इंतजार (काव्य संग्रह ) तथा अस्मिता बोध के विविध आयाम, सोशल मीडिया: वर्चुअल से वास्तविक ( आलोचना पुस्तक ) शामिल हैं | मुक्त शिक्षा परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए ‘ अरुण कमल की कविता ’ तथा ई. पी जी पाठशाला के लिए ‘ समकालीन कविता और कवि कुँवर नारायण ’ पाठ लेखन | जनसत्ता एवं हिंदुस्तान पत्र में समसामयिक मुद्दों और विषयों पर लेख प्रकाशित | विभिन्न महाविद्यालयों की अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रपत्र प्रस्तुत | हिन्दी अकादमी, दिल्ली से दो बार उत्कृष्ट कविता लेखन के लिए पुरस्कृत | वर्ष 2013 में अंतरमहाविद्यालयी स्तर पर विद्यार्थियों की रचनात्मकता को मंच देने हेतु विभाग की हस्तलिखित पत्रिका ‘ पहचान ’ का प्रकाशन आरंभ एवं तब से निरंतर सम्पादन दायित्व वहन |

रमा यादव दिल्ली विश्वविद्यालय से नाटक और रंगमंच में पीएच.डी हैं l इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से ही आधुनिककाल के कवि अज्ञेय पर एम.फिल की है l रमा यादव दिल्ली के श्री राम सेंटर से नाटक निर्देशन और अभिनय में सन २००१ में दो वर्षीय प्रशिक्षण लिया इसके साथ ही भारतीय अनुवाद परिषद् से अनुवाद में भी उन्होंने डिप्लोमा लिया l सन २००१ से रमा यादव देश के वरिष्ठ रंगकर्मी भानु भारती के साथ रंगमंच और रंग पार्श्व में सक्रीय रूप से काम कर रही हैं l रमा यादव सन २०१३ - २०१५ तक भारतीय सांस्कृतिक परिषद् की ओर से हंगरी की राजधानी बुदापेश्त में हिन्दी चेयर पर नियुक्त हुईं l कॉलेज की नाट्य समिति अनुकृति में सन २००५ - २०१३ तक सक्रीय भागीदारी करतीं रहीं l इसके उपरांत रमा यादव कॉलेज की नृत्य समिति मृदंग से भी जुड़ी रहीं l रमा यादव हिन्दी की विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में कहानियां , कवितायेँ , आलोचना लिखती रहीं हैं l रमा यादव का हालिया प्रकाशित नाटक कस्तूरबा के गांधी और इस शहर जिसे कहते हैं दिल्ली मंच पर काफी चर्चित रहे । रमा यादव द्वारा लिखित नाटक - पुनश्च कृष्ण, देश के सुधी रंगकर्मी टीकम जोशी के निर्देशन में भारत के चौबीसवें रंग महोत्सव में मंचित हुआ , इसके साथ ही देश के अन्य मंचों पर भी मंचित हो चुका है ।

बलवन्त कौर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिराण्डा हाउस से हिन्दी भाषा और साहित्य में बी.ए तथा एम.ए किया है ।इन्होंने पीएच.डी उपाधि के लिए अपना शोध ‘हिंदी तथा उर्दू महिला कहानीकारों के तुलनात्मक अध्ययन पर सम्पन्न किया है। हिन्दी तथा अंग्रेजी के अतिरिक्त पंजाबी और उर्दू की भी जानकार। साहित्य के साथ हिन्दुस्तान शास्त्रीय संगीत में भी विशेष दिलचस्पी । पिछले लगभग 18 वर्षों से दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में अध्यापन कर रही हैं। लगभग दस वर्षों तक हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित पत्रिका 'हंस' के सम्पादन कार्य से भी जुड़ी रही । आधुनिक कथा साहित्य, स्त्री अध्ययन, तथा विभाजन पर आधारित साहित्य इनके अध्ययन के मुख्य क्षेत्र हैं।
अब तक हिन्दी साहित्य की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में अनेक लेख और अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त कईं महत्वपूर्ण किताबों का सम्पादन भी किया है। जैसे :- स्त्री आत्मकथांशों की पुस्तक ‘देहरी भई बिदेस’ (राजेन्द्र यादव और अर्चना वर्मा के साथ सह संपादन), राजेन्द्र यादव के सम्पादकीयों की किताबें ‘काश मैं राष्ट्रदोही होता’ तथा ‘वे हमें बदल रहे हैं’, 1931 में ज्योति प्रसाद मिश्र 'निर्मल' द्वारा सम्पादित 'स्त्री कवि कौमुदी' जैसी दुर्लभ पुस्तक की पुनर्प्रस्तुति , 2009 में ‘हंस’ के विशेषांक ‘स्त्री-विमर्श: अगला दौर’ तथा ‘राजेन्द्र यादव रचनावली’ के 15 खंडों का सम्पादन।
आजकल विभाजन से जुड़े भारतीय साहित्य तथा हिन्दी में स्त्री आलोचकों के योगदान पर कार्यरत
संपर्क: हिन्दी विभाग, मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली-7
ई-मेल : balwant.kaur@mirandahouse.ac.in

वर्ष 2006 से मिरांडा हाउस में स्थायी प्राध्यापक के पद पर कार्यरत l एम. ए, एम.फिल और पी.एच.डी राजस्थान विश्वविद्यालय से। ‘दलित आत्मकथाओं में सामाजिक यथार्थ’ विषय पर एम.फिल का शोध कार्य किया और ‘हिंदी आत्मकथा साहित्य: स्वरूप एवं विश्लेषण’ विषय पर पी.एच.डी की उपाधि प्राप्त की। यूजीसी नेट और जे.आर.एफ उत्तीर्ण । मिरांडा हाउस की फाइन आर्ट सोसाइटी और इंडियन डांस सोसाइटी से लंबे समय से जुड़ी रही हैं । विभाग की पत्रिका 'पहचान' के संपादक मंडल में सहभागिता l आत्मकथा साहित्य पर पुस्तक ‘आत्मकथा साहित्य :स्मृतियों का प्रत्याख्यान’ और 'आत्मकथा का लोकतांत्रिक स्वरुप' प्रकाशित। आत्मकथा ,दलित साहित्य , आदिवासी साहित्य तथा विविध विमर्शों पर शोध आलेख अनेक पत्र -पत्रिकाओं और पुस्तकों में प्रकाशितl

डॉ. रेणु अरोड़ा, एम.ए.,एम.फिल.,पीएच.डी.(दिल्ली विश्वविद्यालय)
डॉ. रेणु अरोड़ा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्प्रस्थ महाविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और दिल्ली विश्वविद्यालय से ही एम.फिल् और पी.एच.डी किया। नाटक और रंगमंच उनका विशेष अध्ययन-अध्यापन और रुचि का क्षेत्र है। ‘मोहन राकेश और विजय तेंदुलकर के नाटकों का भारतीय रंग-परिप्रेक्ष्य में तुलनात्मक अध्ययन’ उनके शोध का विषय रहा। वर्ष 2000 में उन्हें पी.एच.डी की उपाधि मिली। हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद का उन्होंने डिप्लोमा कोर्स किया। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से थियेटर एपप्रिसिएशन का कोर्स किया। 1999 से अध्यापन कार्य में संलग्न। अप्रैल 2006 में मिरांडा हाउस में स्थायी प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति। 2022 में प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नत। शिक्षण के अलावा नाट्य-संस्था अनुकृति की नाट्य-गतिविधियों में सक्रिय सहयोग। विजय तेंदुलकर,बादल सरकार,भुवनेश्वर,भीष्म साहनी आदि नाट्य-लेखकों और हबीब तनवीर, ब.व.कारंत,त्रिपुरारी शर्मा आदि रंग-निर्देशकों के नाट्यकर्म पर लिखे लेख नटरंग,रंग-प्रसंग,संगना आदि प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित। रंग-गतिविधियों पर समीक्षा,समसामयिक मुद्दों पर लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। 18 वें भारत रंग महोत्सव में रंग-समीक्षक के तौर पर सक्रिय भागीदारी। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की थियेटर-इन-एजूकेशन कंपनी के लिए उन्हीं के द्वारा खेले गए चार नाटकों का नाट्यालेखन। प्रसिद्ध नाटककार एवं रंग-निर्देशिका त्रिपुरारी शर्मा के नाटक रूप-अरूप और राधा नाट्य-आलेख व प्रस्तुति-समीक्षा कथादेश पत्रिका में प्रकाशित। आकाशवाणी, ‘दिल्ली के महिला एवं बाल प्रभाग’‘विदेश सेवा प्रभाग,(हिंदी)‘से प्रसारित कार्यक्रमों में समय-समय पर भागीदारी।

हिंदी में स्नातक एवं स्नातकोत्तर, दौलत राम, दिल्ली विश्वविद्यालय। 'आखिरी खत में ग्रामीण और शहरी परिवेश' विषय पर एमफिल एवं 'जगदीशचंद्र के उपन्यासों में दलित विमर्श' विषय पर पीएचडी, दिल्ली विश्वविद्यालय। *ख्वाहिशों का आसमान* प्रकाशित काव्य संग्रह। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं शोध पत्र प्रकाशित। आकाशवाणी पर प्रसारित विविध परिचर्चाओं, कवि सम्मेलन एवं वार्ताओं में सक्रिय भागीदारी। दिल्ली विश्वविद्यालय में 2003 से एवं मिरांडा हाउस में 2006 से अध्यापन कार्य में संलग्न। विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रपत्र प्रस्तुति एवं सक्रिय भागीदारी। दिव्यांगों के सर्वांगीण विकास हेतु गठित *लक्षिता सोसाइटी* का 2019 से संयोजक का उत्तरदायित्व। *हौसलों की उड़ान* नाम से लोकसभा चैनल ने इन पर डाक्यूमेंट्री बनाई।

संगीता राय दिल्ली विश्वविद्यालय से एम फ़िल और पीएच. डी. हैं। इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ही उर्दू का अध्ययन किया। इसके साथ ही कोटा यूनिवर्सिटी, राजस्थान से बैचलर ऑफ़ जर्नलिज़्म और मास्टर ऑफ़ जर्नलिज़्म किया। आपने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रोजेक्ट “रंग-दस्तावेज़” के लिए रिसर्च स्कॉलर के रूप में काम किया। “कल्लोल” नामक बाल-पत्रिका का सम्पादन किया। आपने कई वर्षों तक DD NEWS में समाचार प्रस्तोता के रूप में काम किया तथा ऑल इंडिया रेडियो में RJ के रूप में काम किया। पिछले सोलह वर्षों से मिरांडा हाउस में कार्यरत हैं। आपके लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित हंसराज कॉलेज से हिंदी (विशेष) स्नातक (2013) और स्नातकोत्तर (2015) | हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय से "स्त्री और दलित भाषा के सन्दर्भ में 'दलित अस्मिता' पत्रिका का मूल्याङ्कन" विषय में एम्.फिल (2017)|
डॉ. बी.आर. म्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली से "स्त्री सम्पादित पत्रिकाओं में स्त्री प्रश्न " विषय में पीएच.डी., वर्ष 2021|
भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से 'अंग्रेजी से हिंदी' में अनुवाद से सम्बंधित डिप्लोमा |
देश के शैक्षणिक संस्थानों के पाक्षिक समाचार-पत्र 'कैम्पस कॉर्नर' का दस वर्षों से संपादन|
विश्व हिंदी साहित्य परिषद् द्वारा युवा पत्रकारिता सम्मान (2016)|
प्रतिष्ठित पत्रिकाओं लगभग दस शोध-पत्रों का प्रकाशन
दस से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भागीदारी व पत्र-वाचन
लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक एवं सनात्कोत्तर| 'रेणु की स्त्री -दृष्टि : सन्दर्भ मैला आँचल' विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय से एम्.फिल. एवं 'नागार्जुन एवं रेणु के उपन्यासों में अभिव्यक्त स्त्री- दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन' विषय पर दिल्ली विश्वविद्यालय से पी.एचडी. की उपाधि प्राप्त की| हिन्दी विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर अंग्रेजी-हिंदी अनुवाद उपाधिपत्र| 2009-2010 में यूजीसी नेट एवं जे.आर.एफ उत्तीर्ण| वर्ष 2011 से लगातार दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य| वर्ष 2019 से मिरांडा हाउस में अध्यापन| 'कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु: एक नया आयाम' शीर्षक से पुस्तक प्रकाशित | विभिन्न साहित्यिक विषयों पर स्त्रीकाल, अपनी माटी, युवा संवाद जैसी राष्ट्रीय पत्रिकाओं एवं सम्यक प्रकाशन, नटराज प्रकाशन, साहित्य संचय एवं पुस्तकनामा प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तकों में शोध लेख प्रकाशित| जनसत्ता राष्ट्रीय समाचार पत्र में समसामयिक विषयों पर लेख प्रकशित| लोकमित्र से प्रकाशित पुस्तक में कविताओं का प्रकाशन| दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रपत्र प्रस्तुति| वर्ष 2016-2018 तक भित्ति पत्रिका 'सृजन' की संयोजक|

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में पीएच.डी., एम.फिल. तथा यूजीसी-नेट/जेआरएफ जैसी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाली डॉ. अनु कुमारी पिछले नौ वर्षों से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रूप से अध्यापन कर रही हैं। वर्तमान में वे मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में सहायक प्राध्यापक के रूप में ज्ञान, संस्कार और सृजनशीलता का सतत् आलोक प्रसारित कर रही हैं। उनके लिए कक्षा केवल शिक्षण का स्थान नहीं, बल्कि विचारों के नवोन्मेष, संवेदनाओं के विस्तार और व्यक्तित्व-निर्माण की सृजनशाला है। कथा साहित्य और आधुनिक कविता उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। उनके शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।
एक लेखिका और कवयित्री के रूप में डॉ. अनु कुमारी की साहित्यिक यात्रा अत्यंत समृद्ध रही है। उनकी चर्चित कृतियों में 'ज़िन्दगी की तलाश', 'मंज़ूर एहतेशाम के कथा-संग्रह में संवेदना और शिल्प', 'उपन्यास यात्रा : कर्मभूमि एवं झाँसी की रानी' जैसी मौलिक पुस्तकें तथा 'आहट समय की', काव्य धारा, हिंदी कविता,हिंदी कहानी, सहित अनेक संपादित पुस्तकें विशेष उल्लेखनीय हैं। नया ज्ञानोदय, दैनिक जागरण राष्ट्रीय संस्करण, वीर अर्जुन आदि समाचार पत्रों में आपके लेख प्रकाशित हुए हैं।
आपको रचनात्मक शिक्षक सम्मान, विवेकानन्द सम्मान, निशंक का रचना संसार सम्मान, दिल्ली स्टार अवार्ड, पारिवारिक कहानी पुरस्कार प्राप्त हैं । अध्यापन, शोध, लेखन, संपादन, राजभाषा हिन्दी के संवर्धन, व्याख्यान तथा साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजनों के सफल संयोजन के माध्यम से डॉ. अनु कुमारी ने अपने व्यक्तित्व को एक विशेष आयाम दिया है। समाजसेवी संस्थाओं में सक्रिय रूप से कार्यरत आप समाज सेवा के क्षेत्र में अपना योगदान देती रही हैं ।

कुमारी शीतल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी महाविद्यालय से स्नातक एवं मिरांडा हाउस से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ही 2019 में ‘दीनदयाल गिरि की सामाजिक चेतना’ विषय पर एम.फिल. का लघु शोध प्रबंध प्रस्तुत किया। वर्तमान में ये दिल्ली विश्वविद्यालय से ‘घाघ-भड्डरी, दीनदयाल गिरि और गिरिधर कविराय के काव्य में समय, समाज और संस्कृति’ विषय पर पीएचडी कर रही हैं। 2018 में इन्होंने यूजीसी-जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण किया।
वर्तमान में अतिथि शिक्षक के रूप में मिरांडा हाउस में कार्यरत हैं। रीतिकालीन नीतिकाव्य के साथ ब्रजभाषा काव्य में भी इनकी विशेष रुचि है। अनेक संगोष्ठियों में सहभागिता। साखी पत्रिका में पुस्तक समीक्षा और लेख प्रकाशित।

डॉ. विशाल मिश्र (Dr. Vishal Mishra)
असिस्टेंट प्रोफेसर (हिंदी विभाग)
मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
1. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualifications)
पीएच.डी. (Ph.D.) – दिल्ली विश्वविद्यालय (वर्ष 2019 में अवॉर्ड)
शोध का विषय: "डॉ. रामविलास शर्मा के लेखन में मार्क्सवादी सौंदर्यबोध और भारतीय सौंदर्यबोध के द्वंद्व"
जे.आर.एफ. (JRF) – दिसंबर, 2013 में उत्तीर्ण (UGC-NET-JRF)
एम.ए. (M.A. - हिंदी) – जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली
विशेष उपलब्धि: स्वर्ण पदक (Gold Medalist) प्राप्तकर्ता।
स्नातक (B.A.) – इविंग क्रिश्चियन कॉलेज (ECC), इलाहाबाद विश्वविद्यालय
इंटरमीडिएट (12वीं) – देवरिया जिला, उत्तर प्रदेश।
2. अकादमिक और शिक्षण अनुभव (Academic & Teaching Experience)
असिस्टेंट प्रोफेसर (स्थायी/नियमित): मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय (10 अक्टूबर, 2023 से वर्तमान तक)।
कुल शिक्षण अनुभव: विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी भाषा और साहित्य के अध्यापन का समृद्ध अनुभव।
आमंत्रित वक्ता (Invited Speaker): दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रतिष्ठित महाविद्यालयों और शैक्षणिक मंचों पर निरंतर विशिष्ट वक्ता के रूप में व्याख्यान व वक्तव्य।
3. पुरस्कार एवं सम्मान (Awards & Recognitions)
गोल्ड मेडल (Gold Medal): एम.ए. (हिंदी) में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया द्वारा सम्मानित।
मेधावी विद्यार्थी सम्मान: बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) द्वारा उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए प्रदत्त सम्मान।
4. शोध एवं प्रकाशन (Research & Publications)
शोध पत्र/आलेख: यूजीसी (UGC) सूचीबद्ध/केयर लिस्टेड (Care Listed) प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में दर्जनों से अधिक शोध आलेख और समीक्षाएं प्रकाशित।
विशेषज्ञता/रुचि के क्षेत्र: डॉ. रामविलास शर्मा का आलोचना-कर्म, मार्क्सवादी और भारतीय सौंदर्यशास्त्र का तुलनात्मक अध्ययन, हिंदी साहित्य का इतिहास, कथा साहित्य और समकालीन विमर्श।
5. संस्थागत/कॉलेज समितियां और प्रशासनिक दायित्व (Institutional Responsibilities)
मिरांडा हाउस कॉलेज के सुचारू संचालन और छात्र कल्याण के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण समितियों में सक्रिय सदस्य के रूप में कार्यरत:
सदस्य, गार्डन कमेटी (Garden Committee), मिरांडा हाउस।
सदस्य, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS Cell), मिरांडा हाउस।
सदस्य, छात्र संघ (Students' Union Advisory/Committee), मिरांडा हाउस।
6. व्यक्तिगत विवरण (Personal Details)
जन्म तिथि: 03 जुलाई, 1991
गृह जनपद व राज्य: देवरिया, उत्तर प्रदेश
भाषा ज्ञान: हिंदी, अंग्रेजी, भोजपुरी (क्षेत्रीय)


रजत तिवारी ने किरोड़ीमल महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। इनका स्नातकोत्तर भी हिंदी में देशबंधु महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय से हुआ है। दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर में हिंदी विभाग से 'पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा' किया है और इग्नू से 'अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा' भी किया है। चार बार यूजीसी नेट की परीक्षा उत्तीर्ण की है। दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में भागीदारी एवं पत्र वाचन किया है। वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से सामाजिक चेतना पर आधारित हिंदी सिनेमा पर शोध कार्य कर रहे हैं। अभी मिरांडा हाउस महाविद्यालय के हिंदी विभाग में अतिथि सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।

